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Saturday, June 10, 2017
Thursday, May 11, 2017
शब-ए-बारात के खास मौके पर इबादत करने के लिए जुटी लोगों की भीड़।
Tuesday, April 25, 2017
भगवान श्री कृष्ण ने कलियुग में घटित होने वाली घटनाओं को पहले ही बता दिया था।जानिए विस्तार से।
महाभारत के समय की बात है पाँचों पाण्डवों ने भगवान श्रीकृष्ण से कलियुग के बारे में चर्चा की और कलियुग के बारे में विस्तार से पुछा और जानने की इच्छा जाहिर की कि कलियुग में मनुष्य कैसा होगा, उसके व्यवहार कैसे होंगे और उसे मोक्ष कैसे प्राप्त होगा |
इन्ही प्रश्नों का उत्तर देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं- "तुम पाँचों भाई वन में जाओ और जो कुछ भी दिखे वह आकर मुझे बताओ। मैं तुम्हें उसका प्रभाव बताऊँगा।" पाँचों भाई वन में गये।
युधिष्ठिर महाराज ने देखा कि किसी हाथी की दो सूँड है। यह देखकर आश्चर्य का पार न रहा।
अर्जुन दूसरी दिशा में गये। वहाँ उन्होंने देखा कि कोई पक्षी है, उसके पंखों पर वेद की ऋचाएँ लिखी हुई हैं पर वह पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा है यह भी आश्चर्य है !
भीम ने तीसरा आश्चर्य देखा कि गाय ने बछड़े को जन्म दिया है और बछड़े को इतना चाट रही है कि बछड़ा लहुलुहान हो जाता है।
सहदेव ने चौथा आश्चर्य देखा कि छः सात कुएँ हैं और आसपास के कुओं में पानी है किन्तु बीच का कुआँ खाली है। बीच का कुआँ गहरा है फिर भी पानी नहीं है।
पाँचवे भाई नकुल ने भी एक अदभुत आश्चर्य देखा कि एक पहाड़ के ऊपर से एक बड़ी शिला लुढ़कती-लुढ़कती आती और कितने ही वृक्षों से टकराई पर उन वृक्षों के तने उसे रोक न सके। कितनी ही अन्य शिलाओं के साथ टकराई पर वह रुक न सकीं। अंत में एक अत्यंत छोटे पौधे का स्पर्श होते ही वह स्थिर हो गई। पाँचों भाईयों के आश्चर्यों का कोई पार नहीं
शाम को वे श्रीकृष्ण के पास गये और अपने अलग-अलग दृश्यों का वर्णन किया।
युधिष्ठिर कहते हैं- "मैंने दो सूँडवाला हाथी देखा तो मेरे आश्चर्य का कोई पार न रहा।"
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तब श्री कृष्ण कहते हैं- "कलियुग में ऐसे लोगों का राज्य होगा जो दोनों ओर से शोषण करेंगे। बोलेंगे कुछ और करेंगे कुछ। ऐसे लोगों का राज्य होगा। इससे तुम पहले राज्य कर लो।"
अर्जुन ने आश्चर्य देखा कि पक्षी के पंखों पर वेद की ऋचाएँ लिखी हुई हैं और पक्षी मुर्दे का मांस खा रहा है। इसी प्रकार कलियुग में ऐसे लोग रहेंगे जो बड़े- बड़े पंडित और विद्वान कहलायेंगे किन्तु वे यही देखते रहेंगे कि कौन-सा मनुष्य मरे और हमारे नाम से संपत्ति कर जाये। "संस्था" के व्यक्ति विचारेंगे कि कौन सा मनुष्य मरे और संस्था हमारे नाम से हो जाये। हर जाति धर्म के प्रमुख पद पर बैठे विचार करेंगे कि कब किसका श्राद्ध है ?
चाहे कितने भी बड़े लोग होंगे किन्तु उनकी दृष्टि तो धन के ऊपर (मांस के ऊपर) ही रहेगी।
ऐसे लोगों की बहुतायत होगी जो परधन को हरने और छीनने को आतुर होंगे और कोई कोई विरला ही संत पुरूष होगा।
भीम ने तीसरा आश्चर्य देखा कि गाय अपने बछड़े को इतना चाटती है बछड़ा लहुलुहान हो जाता है। कलियुग का आदमी शिशुपाल हो जायेगा। बालकों के लिए इतनी ममता करेगा कि उन्हें अपने विकास का अवसर ही नहीं मिलेगा। ""किसी का बेटा घर छोड़कर साधु बनेगा तो हजारों व्यक्ति दर्शन करेंगे.... किन्तु यदि अपना बेटा साधु बनता होगा तो रोयेंगे कि मेरे बेटे का क्या होगा ?""
इतनी सारी ममता होगी कि उसे मोहमाया और परिवार में ही बाँधकर रखेंगे और उसका जीवन वहीं खत्म हो जाएगा। अंत में बिचारा अनाथ होकर मरेगा। वास्तव में लड़के तुम्हारे नहीं हैं, वे तो बहुओं की अमानत हैं, लड़कियाँ जमाइयों की अमानत हैं और तुम्हारा यह शरीर मृत्यु की अमानत है। तुम्हारी आत्मा-परमात्मा की अमानत है ।
तुम अपने शाश्वत संबंध को जान लो बस !
सहदेव ने चौथा आश्चर्य यह देखा कि पाँच सात भरे कुएँ के बीच का कुआँ एक दम खाली ! कलियुग में धनाढय लोग लड़के-लड़की के विवाह में, मकान के उत्सव में, छोटे-बड़े उत्सवों में तो लाखों रूपये खर्च कर देंगे परन्तु पड़ोस में ही यदि कोई भूखा प्यासा होगा तो यह नहीं देखेंगे कि उसका पेट भरा है या नहीं। दूसरी और मौज-मौज में, शराब, कबाब, फैशन और व्यसन में पैसे उड़ा देंगे। किन्तु किसी के दो आँसूँ पोंछने में उनकी रूचि न होगी और जिनकी रूचि होगी उन पर कलियुग का प्रभाव नहीं होगा, उन पर भगवान का प्रभाव होगा।
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पाँचवा आश्चर्य यह था कि एक बड़ी चट्टान पहाड़ पर से लुढ़की, वृक्षों के तने और चट्टाने उसे रोक न पाये किन्तु एक छोटे से पौधे से टकराते ही वह चट्टान रूक गई। कलियुग में मानव का मन नीचे गिरेगा, उसका जीवन पतित होगा। यह पतित जीवन धन की शिलाओं से नहीं रूकेगा न ही सत्ता के वृक्षों से रूकेगा। किन्तु हरिनाम के एक छोटे से पौधे से, हरि कीर्तन के एक छोटे से पौधे से मनुष्य जीवन का पतन होना रूक जायेगा।
Sunday, April 23, 2017
हर जीव अपने कर्म के अनुसार ही फल पाता हैं और सुख दुःख को भोगता हैं।
जीवों में शरीर तथा इन्द्रियों की विभिन्न अभिव्यक्तियां प्रकृति के कारण हैं. कुल मिलाकर 84 लाख भिन्न-भिन्न योनियां हैं और ये सब प्रकृतिजन्य हैं. जीव के विभिन्न इन्द्रिय-सुखों से ये योनिया मिलती हैं जो इस या उस शरीर में रहने की इच्छा करता है. जब उसे विभिन्न शरीर प्राप्त होते हैं तो वह विभिन्न प्रकार के सुख तथा दुख भोगता है. उसके भौतिक सुख-दुख शरीर के कारण होते हैं, स्वयं उसके कारण नहीं. उसकी मूल अवस्था में भोग में कोई सन्देह नहीं रहता, अत वही उसकी वास्तविक स्थिति है.
वह प्रकृति पर प्रभुत्व जताने के लिए भौतिक जगत में आता है. वैकुंठ लोक शुद्ध है, किन्तु भौतिक जगत में प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न प्रकार के शरीर-सुखों को प्राप्त करने के लिए संघर्षरत रहता है.
यह कहने से बात और स्पष्ट हो जाएगी कि यह शरीर इन्द्रियों का कार्य है. इन्द्रियां इच्छाओं की पूर्ति का साधन हैं. यह शरीर तथा हेतु रूप इन्द्रियां प्रकृति द्वारा प्रदत्त हैं और जीव को पूर्व आकांक्षा तथा कर्म के अनुसार परिस्थितियों के वश वरदान या शाप मिलता है. जीव की इच्छाओं तथा कर्मों के अनुसार प्रकृति उसे विभिन्न स्थानों में पहुंचाती है.
जीव स्वयं ऐसे स्थानों में जाने तथा मिलने वाले सुख-दुख का कारण होता है.
एक प्रकार का शरीर प्राप्त होने पर वह प्रकृति के वश में हो जाता है. शरीर, पदार्थ होने के कारण प्रकृति के नियमानुसार कार्य करता है. उस समय शरीर में ऐसी शक्ति नहीं होती कि वह उस नियम को बदल सके.
उदाहरण के लिए ज्यों ही वह कुत्ते के शरीर में स्थापित किया जाता है, उसे कुत्ते की भांति आचरण करना होता है. यदि जीव को शूकर का शरीर प्राप्त होता है, तो वह मल खाने तथा शूकर की भांति रहने के लिए बाध्य है. इसी प्रकार यदि जीव को देवता का शरीर प्राप्त होता है, तो उसे अपने शरीर के अनुसार कार्य करना होता है. यही प्रकृति का नियम है. लेकिन समस्त परिस्थितियों में परमात्मा जीव के साथ विद्यमान रहता है.
Tuesday, April 18, 2017
श्यामडीह कतरास बजरंबली मंदिर से शतचंडी यज्ञ को लेकर निकली कलश यात्रा में झूमते भक्तगण
गोपालपुर श्यामडीह कतरास बजरंगबली मंदिर से सोमवार को श्री श्री 108 शतचंडी महायज्ञ को लेकर भव्य कलश यात्रा निकाली गई।501 कन्या व महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर इस कलश यात्रा में भाग लिए।
Tuesday, April 11, 2017
हनुमान जयंती में हनुमान जी को अपनी भक्ति से प्रसन्न कर शुभ फल की प्राप्ति करें।
11 अप्रैल को हनुमान जयंती है. बजरंग बली धीर-वीर परम रामभक्त हनुमान जी के भक्तों के लिए भगवान हनुमान का जन्मदिन यानी उनकी जयंती विशेष महत्त्व रखती है. पंडितों और ज्योतिषियों की मानें तो इस साल की हनुमान जयंती विशेष महत्त्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि 120 सालों के बाद बाद इस साल की हनुमान जयंती पर बड़े ही खास संयोग बन रहे हैं. इसलिए इस दिन हनुमानजी की पूजा-अर्चना से भक्तों पर ख़ास अनुकम्पा होगी.
ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल हनुमान जयंती पर कुछ वैसा ही योग बन रहा है, जैसा कि शास्त्रों में हनुमानजी के जन्म के समय बताए गए हैं. इस दिन मंगलवार, पूर्णिमा तिथि, चित्रा नक्षत्र रहेगा. पोथियों और शास्त्रों में अंजनीपुत्र हनुमान के जन्म के समय भी यही योग बताए गए हैं.
साथ ही इस दिन एक विशेष योग गजकेसरी भी बन रह है और दिन का योग अमृत रहेगा, जो शुभदायी माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, जिन व्यक्तियों पर कर्माधीश शनि महाराज की साढ़ेसाती या उनकी ढैया चल रही होगी तो यह दिन उनके लिए बहुत शुभ रहेगा. इस दिन हनुमानजी की पूजा व आराधना से ये दोष मलिन होने लगेंगे.तो,आज हनुमान जयंती में हनुमान जी को अपनी भक्ति से प्रसन्न कर.शुभ फल प्राप्त करें।
Sunday, April 9, 2017
महावीर जयंती के शुभ अवसर पर प्रस्तुत हैं उनके अनमोल सुविचार,जरूर बढ़ें हो सकता हैं आपकी ज़िंदगी बदल जाये।
हिन्दू और जैन पंचांग के अनुसार, जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के जन्म-दिवस के अवसर पर चैत्र महीने की शुक्ल-त्रयोदशी के दिन महावीर जयंती मनाई जाती है. उनके कुछ अनमोल विचार जो जीवन को सही दिशा दिखाती हैं.जरूर पढ़ें.
अनमोल विचार
1: किसी के अस्तित्व को मत मिटाओ. शांतिपूर्वक जियो और दूसरों को भी जीने दो.
अनमोल विचार
2: अहिंसा परमो धर्म अर्थात अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है. शांति और आत्म-नियंत्रण ही सही मायने में अहिंसा है.
अनमोल विचार
3: आपने कभी किसी का भला किया हो तो उसे भूल जाओ. और कभी किसी ने आपका बुरा किया हो तो उसे भूल जाओ.
अनमोल विचार
4: हर जीवित प्राणी के प्रति दयाभाव ही अहिंसा है. घृणा से मनुष्य का विनाश होता है. सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान अहिंसा है.
अनमोल विचार
5: सभी मनुष्य अपने स्वयं के दोष की वजह से दुखी होते हैं, और वे खुद अपनी गलती सुधार कर सुखी हो सकते हैं.
अनमोल विचार
6: आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है. असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं, वो शत्रु हैं क्रोध, घमंड, लालच, आसक्ति और नफरत. खुद पर विजय प्राप्त करना लाखों शत्रुओं पर विजय पाने से बेहतर है. स्वयं से लड़ो, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? वह जो स्वयम पर विजय कर लेगा उसे आनंद की प्राप्ति होगी.
अनमोल विचार
7: प्रत्येक आत्मा स्वयं में सर्वज्ञ और आनंदमय है. आनंद बाहर से नहीं आता. आत्मा अकेले आती है अकेले चली जाती है, न कोई उसका साथ देता है न कोई उसका मित्र बनता है. किसी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना है, और यह केवल आत्म ज्ञान प्राप्त कर के ठीक की जा सकती है.
अनमोल विचार
8: भगवान् का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है. हर कोई सही दिशा में सर्वोच्च प्रयास कर के देवत्त्व प्राप्त कर सकता है. प्रत्येक जीव स्वतंत्र है, कोई किसी और पर निर्भर नहीं करता. आपात स्थिति में मन को डगमगाना नहीं चाहिये.
अनमोल विचार
9: 'धम्मो मंगल मुक्किट्ठं. अहिंसा संजमो तवो' अर्थात धर्म उत्कृष्ट मंगल है. वह अहिंसा, संयम, तप रूप है. एक धर्म ही रक्षा करने वाला है. धर्म के सिवाय संसार में कोई भी मनुष्य का रक्षक नहीं है.
अनमोल विचार
10: 'एगा धम्म पडिमा, जं से आया पवज्जवजाए' अर्थात धर्म एक ऐसा पवित्र अनुष्ठान है जिससे आत्मा का शुद्धिकरण होता है. मनुष्य को अपने जीवन में जो धारण करना चाहिए, वही धर्म है.